फैशन की अंधी लहर में बहना हमेशा सही नहीं होता

फैशन

आज कल के ज़माने में फैशन के मायने बहुत ज़्यादा है। फैशन में कई चीज़े आती है जैसे अच्छे कपडे और गहने और उसमे भी लड़का और लड़की के लिए अलग अलग चीज़े भी शामिल है। हर दौर अपने साथ एक चलन ले कर चलता है जिसे फैशन कहते हैं लेकिन न तो फैशन को आधुनिकता का पर्याय माना जा सकता है और न ही इसकी अंधी लहर में बहना उचित होता है।

कपड़े, हेयर स्टाइल, मेकअप, कहीं भी कुछ भी पुराना नहीं होता। बदलाव के साथ साथ कुछ नए प्रयोग चलते रहते हैं। वह यह भी कहते हैं कि जो भी लोगों को भा जाए, वह चलन में आ जाता है और उसे ही फैशन नाम दे दिया जाता है। लेकिन कोई भी प्रयोग या बदलाव यह सोच कर नहीं किया जाता है कि इससे एक नए फैशन की शुरूआत होगी। दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र में एमए कर रहे मलय चौधरी कहते हैं ‘फैशन तो वही होता है जो चलन में होता है। आज अगर जींस का दौर है और मैं धोती पहनूँ तो कैसा लगेगा। धोती पहन कर कॉलेज नहीं जाया जा सकता, लेकिन किसी खास समारोह में अगर मैं धोती पहने नजर आउं तो शायद मैं ही फैशनेबल कहलाउँगा।’

विदेशों में नौ जुलाई को फैशन डे मनाया जाता है। लेकिन निखिल मानते हैं कि हमारे देश में फैशन डे के बारे में शायद किसी ने भी नहीं सुना होगा । हमारे यहां फैशन की बहार है पर इसके लिए अब तक कोई दिन समर्पित नहीं किया गया है। शहर में एक जेन्ट्स ब्यूटी पार्लर के संचालक संजय गुप्ता कहते हैं ‘अक्सर फैशन की शुरूआत फिल्मों से होती है। फिल्मों में नायक नायिका ने जो पहना, वही फैशन बन जाता है। गजनी फिल्म जब आई तो युवा वर्ग आमिर खान की तरह हेयर स्टाइल पसंद करने लगा। लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया कि वह हेयर स्टाइल हर युवा के चेहरे पर अच्छी नहीं लगती।’

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