आंध्र प्रदेश का चित्तूर रखता है ऐतिहासिक महत्‍व

आंध्र प्रदेश में घूमने के लिए काफी साड़ी जगह मौजूद है और ज़्यादा तर जगह अपने आप में एक इतिहास है आंध्र प्रदेश में स्थित चित्तूर न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है बल्कि यहां पर कुछ सबसे खूबसूरत दृश्‍यों का बसेरा भी है। संस्कृति और परंपराओं से समृद्ध चित्तूर प्राकृतिक और स्थापत्य कला का एक सहज समागम है। इस जगह पर कई सुंदर अभयारण्य और वास्तुशिल्प देखने को मिलते हैं।

शहर के केंद्र में स्थिति गुर्रमकोंडा किला अपने देहाती अंदरूनी हिस्सों के लिए मशहूर है। 500 फीट की ऊंचाई पर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित ये किला विजयनगर साम्राज्य के शासनकाल से संबंधित है। शुरुआत में इस किले को मिट्टी और चट्टानों से बनाया गया था लेकिन बाद में जब यह गोलकोंडा सुल्तानों के हाथों में आ गया। तब किले को चट्टान की दीवारों के साथ मजबूत किया गया। सुल्तान हैदर अली और टीपू सुल्तान ने एक बार इस किले पर कब्जा कर लिया था।

चित्तूर का होर्सले हिल स्टेशन एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है जो स्थानीय लोगों के बीच ‘आंध्र ऊटी ‘के नाम से भी जाना जाता है। अपने परिवार या प्रियतम के साथ घूमने के लिए ये शानदार जगह है। ऊंची पहाड़ी से सनसैट का सुंदर नज़ारा इस जगह के प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगा देता है। यहां पर ट्रैकिंग का मज़ा भी ले सकते हैं। सुंदर नक्काशीदार पार्क और छोटे चिड़ियाघर यहां आपके मनोरंजन को तैयार रहते हैं।

एरगोंडा और पोन्नई नदियों के संगम स्‍थान पर बसा कलावगुंटा ऐतिहासिक महत्व रखता है। इस जगह पर कई खूबसूरत मंदिर भी स्थित हैं। इन आकर्षक स्‍थापत्‍यकला से सजे मंदिरों की शुरुआत 9वीं शताब्दी से हुई थी। चोल स्थापत्यशैली में निर्मित, मंदिर जटिल, विस्तृत नक्काशी से सुशोभित हैं जो उस काल के कारीगरों की प्रतिभा को चित्रित करते हैं।

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