पूर्वोत्तर भारत की खूबसूरत जगह कमलपुर

भारत में घूमते समय हमें ये एहसास ज़रूर होता है की आज के ज़माने में भी भारत में दूसरे देशो से ज़्यादा हरियाली मौजूद है त्रिपुरा के पूर्वी क्षेत्र में धलाई जिले में स्थित कमलपुर झरनों, झिलमिलाती झीलों और खूबसूरत नज़ारों से भरा है। इसके अलावा सुहावना मौसम अनोखे स्‍वदेशी पहलुओं के साथ कमलपुर पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ों और झीलों के बीच बचा है। यह जगह न सिर्फ दर्शनीय है बल्कि उत्तर-पूर्व की प्रमाणिक संस्कृति और यहां रहने वाली जनजातियों के घर का आतिथ्य भी कमलपुर को पर्यटकों के बीच लोकप्रिय बनाता है। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर यहां पर शहरी लोगों को असीम शांति का अहसास होता है। यदि आप आदिवासी लोगों की सांस्कृतिक जातीयता और जीवन शैली में चुपके से झांकना चाहते हैं, तो कमलपुर को अपनी लिस्‍ट में जरूर रखें।

उनाकोटी का बंगाली में मतलब होता है ‘एक करोड़ से भी कम’। 7वीं शताब्‍दी से उनाकोटि एक प्रमुख धार्मिक स्‍थल है जहां पर भगवान शिव की मूर्ति स्‍थापित है। उनाकोटी में स्‍थापित भगवान शिव की विशाल मूर्ति बहुत शानदार है जोकि पुराने समय की नक्‍काशी को दर्शाती है। किंवदंती है कि शानदार मूर्तिकार कल्लू कुमार ने इस मूर्ति का निर्माण किया था। उसके सपने में भगवान शिव ने आकर उनकी विशाल मूर्ति बनाने का निर्देश दिया था। यहां भगवान विष्णु, गणेश, नंदी, नरसिंह, हनुमान और कई अन्य देवी देवताओं की भी मूर्तियां स्‍थापित हैं।

कमलपुर की राइमा घाटी प्राकृतिक रूप से बहुत सुंदर है और यहां पर पर्यटकों को मनोरम दृश्‍य देखने को मिलते हैं। राइमा को त्रिपुरा जनजाति की मां का दर्जा प्राप्‍त है। इस घाटी से बहती राइमा नदी इस पूरे क्षेत्र के सौंदर्य में चार चांद लगाती है। इस ज्ञाटी में कई तरह की वनस्‍पतियां पाई जाती हैं। कमलपुर में किसी शांत जगह की खोज कर रहे हैं तो आपको राइमा घाटी आना चाहिए। ये एक शानदार पिकनिक स्‍पॉट भी है। रोवा वन्यजीव अभयारण्य लगभग 86 हेक्टेयर भूमि के क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां हरे-भरे वर्षावन और वनस्पतियां एवं जीव बहुतायत में पाए जाते हैं। इस स्थान की देखभाल खासी जनजाति द्वारा की जाती है। यह अभयारण्य एक पर्यटन स्थल है एवं इसकी जैव विविधता एक समृद्ध विरासत है। जंगली जानवरों और विदेशी पक्षियों की 120 से अधिक प्रजातियां यहां देखने को मिलती हैं। इसके अलावा इस अभयारण्य में विदेशी जंगली पौधे, वनस्पति झाड़ियां, पुराने पेड़ों की भी भरमार है।

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