तालाबों से गुलज़ार है मैसूर का मेलूकोटे गांव

तालाबों से गुलज़ार है मैसूर का मेलूकोटे गांव, यहां हुई थी 'भुलभुलैया' फिल्म की शूटिंग

सबसे खास यहां की राजबीथी यानी राजपथ है, जहां पर डेढ़ सौ साल पुराने करीब 70-80 घर हैं। जिसमें मंदिरों के पुरोहित लोग रहते हैं। ऐसी ही एक सड़क कन्नीगलबीथी है, जिसमें पंडित लोग रहते हैं। हमारे साथ आए संस्कृत के स्कॉलर डॉ. दिलीप कर बताते हैं गांव में छोटे बड़े तालाब मिलाकर करीब 108 तालाब हैं, इनमें से तो कुछ सीढीनुमा भी हैं। सभी तालाबों के बनने की कहानी भी दिलचस्प है। जैसे आका तंगी कोला यानी बड़ी बहन और छोटी बहन का तालाब। कहा जाता है कि गांव में दो बहनें थी। उसके नाम पर उनके पिताजी ने तालाब बनवाया, लेकिन दोनों की प्रकृति और कर्म के आधार पर इन तालाबों की सीरत तय हुई। स्थानीय लोगों की मान्यता के अनुसार बड़ी बहन के कर्म पाप से भरे हुए थे इसलिए इस तालाब का पानी दूषित रह गया और छोटी बहन के कर्म अच्छे रहे, इसलिए तालाब का पानी पीने योग्य है। आज भी गांव के लोग पीने का पानी यही से पीते हैं।

इन किस्से कहानियों के दिलचस्प दौर के बीच हमारी गाड़ी मेलकोटे गांव में पहुंची। रास्ते भर खेत- खलिहान, गांव-देहात पीछे छूटते जाते नजारों के बीच उन कहानियों से मेलूकोटे गांव की कुछ तस्वीर भी जहन में उकर गईं थी, लेकिन गांव का सौंदर्य जहनी तस्वीर से कहीं ज्यादा उम्दा और रूह को छू लेने वाली है। मौसम भी खुशगवार रहने के साथ यहां प्रकृति ने अपना बेशुमार प्यार लुटाया है। पहाडि़यों के बीच बसे इस गांव में जहां तक नजर जाती है, वहां प्रकृति मुस्कुराती नजर आती है। इन नजारों के बीच ऐतिहासिक धरोहरों के खजाने भी बिखरे हुए हैं। राजबीथी यानी मुख्य सड़क के दोनों ओर नारियल, आम काजू के पेड़ ऐसे लगते हैं, जैसे- आगंतुकों का स्वागत करने के लिए ही लगाए गए हों, पर ऐसा नहीं हैं।

यहां हर घर और खेतों के बाड़े में पेड़ लगाने की बरसों पुरानी परंपरा है। शायद इस परंपरा की वजह से ही यहां की शुद्ध हवाओं में मौजूद शीतलता लोगों के मन को तर कर जाती है। इन पेड़ पौधों के बीच कई दो मंजिला पुरानी इमारतें भी झांकती नजर आती हैं। कतारों से बनी पुरानी हवेलियों के दरों- दरवाजे, झरोखों, लकड़ी के छज्जों की बनावट की छटां को निहारते हुए नजरे हवेली के बड़े से आंगन में ठहरती है, जहां महिलाएं हल्दी के साथ कुछ मसाले सुखाती नजर आती हैं। कौतूहल के मारे वहां की एक महिला से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वे पूजा में हल्दी का इस्तेमाल करती हैं। बातों बातों में पता चला कि यह स्थल वैष्णव समुदाय के लोगों के चार महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है। यहां एक कल्याणी तालाब व मंडप है, जो तीर्थ स्थल है, खासकर शादी ब्याह कराने, व मन्नत पूरी होने पर लोग यहां दूर-दूर से आते हैं। जिज्ञासा बढ़ी और कल्याणी तालाब में डुबकी लगाने का मन भी हो आया।

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