दुनिया में मनाए जाते हैं 70 से अधिक नववर्ष

1 जनवरी को मनाया जाने वाला नववर्ष दरअसल ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आधारित है। इसकी शुरूआत रोमन कैलेंडर से हुई है। पारंपरिक रोमन कैलेंडर का नववर्ष 1 मार्च से शुरू होता है। प्रसिद्ध रोमन सम्राट जूलियस सीजर ने 47 ईसा पूर्व में इस कैलेंडर में परिवर्तन किया और इसमें जुलाई मास जोड़ा। इसके बाद उसके भतीजे के नाम के आधार पर इसमें अगस्त मास जोड़ा गया। दुनिया भर में आज जो कैलेंडर प्रचलित हैं, उसे पोप ग्रेगोरी अष्टम ने 1582 में तैयार किया था। ग्रेगोरी ने इसमें लीप ईयर का प्रावधान किया था।

इस्लामिक कैलेंडर
इस्लाम धर्म के कैलेंडर को हिजरी साल के नाम से जाना जाता है । इसका नववर्ष मोहर्रम मास के पहले दिन होता है । हिजरी कैलेंडर कर्बला की लड़ाई के पहले ही निर्धारित कर लिया गया था। मोहर्रम के दसवें दिन को आशूरा के रूप में जाना जाता है । इसी दिन पैगम्बर मोहम्मद (स.) के नवासे इमाम हुसैन बगदाद के निकट कर्बला में शहीद हुए थे। हिजरी कैलेंडर के बारे में एक दिलचस्प बात यह है कि इसमें चंद्रमा की घटती-बढ़ती चाल के अनुसार दिनों का संयोजन नहीं किया गया है। लिहाजा इसके महीने हर साल करीब 10 दिन पीछे खिसकते रहते हैं।

अन्य देशों में नववर्ष
भारत के पड़ोसी देश चीन में भी अपना एक अलग कैलेंडर है। तकरीबन सभी पुरानी सभ्यताओं के अनुसार चीन का कैलेंडर भी चंद्रमा की गणना पर आधारित है। इसका नया साल 21 जनवरी से 21 फरवरी के बीच पड़ता है। चीनी महिनों के नाम 12 जानवरों के नाम पर रखे गए हैं। चीनी ज्योतिष में लोगों की राशियां भी 12 जानवरों के नाम पर होती हैं। लिहाजा यदि किसी की बंदर राशि है और नया वर्ष भी बंदर आ रहा हो तो वह साल उस व्यक्ति के लिए विशेष तौर पर भाग्यशाली माना जाता है।

1 जनवरी को अब नए साल के जश्न के रूप में मनाया जाता है। एक दूसरे को देखा-देखी यह जश्न मनाने वाले शायद ही जानते हों कि दुनिया भर में पूरे 70 नववर्ष मनाए जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि आज भी पूरी दुनिया कैलेंडर प्रणाली पर एकमत नहीं है। इक्कीसवीं शताब्दी के वैज्ञानिक युग में इंसान अंतरिक्ष में जा पहुंचा, मगर कहीं सूर्य पर आधारित और कहीं चंद्रमा पर आधारित और कहीं तारों की चाल पर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दुनिया में विभिन्न कैलेंडर प्रणालियां लागू हैं। यही वजह है कि अकेले भारत में पूरे साल तीस अलग अलग नववर्ष मनाए जाते हैं। दुनिया में सर्वाधिक प्रचलित कैलेंडर ‘ग्रेगोरियन कैलेंडर’ है जिसे पोप ग्रेगरी तेरह ने 24 फरवरी, 1582 को लागू किया था। यह कैलेंडर 15 अक्तूबर 1582 को शुरू हुआ। इसमें अनेक त्रुटियां होने के बावजूद कई प्राचीन कैलेंडरों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आज भी मान्यता मिली हुई है।

विभिन्न देशों में विभिन्न नववर्ष
जापानी नववर्ष गनतन-साई या’ ओषोगत्सू’ के नाम से भी जाना जाता है। महायान बौद्ध 7 जनवरी, प्राचीन स्कॉट में 11 जनवरी, वेल्स के इवान वैली में नववर्ष 12 जनवरी, सोवियत रूस के रूढ़िवादी चर्चा, आरमेनिया और रोम में नववर्ष 14 जनवरी को होता है। वहीं सेल्टिक, कोरिया, वियतनाम, तिब्बत, लेबनान और चीन में नववर्ष 21 जनवरी को प्रारंभ होता है।
प्राचीन आयरलैंड में नववर्ष 1 फरवरी को मनाया जाता है तो प्राचीन रोम में 1 मार्च को। इसके अतिरिक्त ईरान, प्राचीन रूस तथा भारत में बहाई, तेलुगु तथा जमशेदी (जोरोस्ट्रियन) का नया वर्ष 21 मार्च से शुरू होता है। प्राचीन ब्रिटेन में नववर्ष 25 मार्च को प्रारंभ होता हैं।
प्राचीन फ्रांस में 1 अप्रैल से अपना नया साल प्रारंभ करने की परंपरा थी। यह दिन ‘अप्रैल फूल’ के रूप में भी जाना जाता है। थाईलैंड, बर्मा, श्रीलंका, कम्बोडिया और लाओ के लोग 7 अप्रैल को बौद्ध नववर्ष मनाते हैं।

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