कर्नाटक के कश्मीर नाम से मशहूर कुर्ग की खूबसूरती देखनी है, तो मानसून है बेहतरीन सीज़न

कर्नाटक के कश्मीर नाम से मशहूर कुर्ग की खूबसूरती देखनी है, तो मानसून है बेहतरीन सीज़न

एब्बी जलप्रपात
कावेरी की जलधारा के भीषण बहाव से पैदा होती गर्जना आपको मीलों दूर से अपनी ओर आकर्षित करेगी, मानो यह जलधारा कह रही हो कि कुछ क्षण के लिए दुनिया का सारा कोलाहल भूलकर इस जलध्वनि के संगीत में खो जाएं। वन विभाग ने यात्रियों की सुविधा के लिए यहां एक ‘व्यू पॉइंट’ का निर्माण भी किया है, जहां से आप घंटों तक एब्बी जलप्रपात की तेज धारा में अपने को विलीन कर सकते हैं।

मंडलपट्टी की जीप सफारी
कुर्ग से तकरीबन 20-25 किमी. दूर है मंगलपट्टी। पुष्पगिरि के घने जंगल से गुजरकर पहाड़ों की समतल चोटियों पर स्थित मंडलपट्टी की ढलान सहसा लुभा लेती है। बारिश के मौसम में ताजा नहाए घास एवं हवा के झोंकों के साथ झूमते जंगली फूलों से इस पट्टी की सुंदरता दोगुनी हो जाती है। बादलों में लिपटी इस घाटी में जीप की सफारी करना लगभग हर यात्री की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रहता है। एब्बी जलप्रपात जाते हुए रास्ते में ही स्थित स्थानीय जीप यूनियन से आप जीप बुक कर सूर्यास्त तक इस सफारी का मजा ले सकते हैं।

कुर्ग की कॉफी : नहीं भूलेंगे यह स्वाद!
आसमान छूते पेड़ों की छांव में ‘बोंसाई पौधों’ के समान प्रतीत होते हैं ये कॉफी के पौधे। इन पर लगे चटकीले लाल रंग के मोतीरूपी फल दुनिया भर के प्रकृतिप्रेमियों को आकर्षित करते हैं। यहां पेड़ों से लिपटकर रेंगती हुई काली मिर्च की बेलें और कोहरे में छिपे कॉफी के पौधे किसी रहस्यमयी जंगल-सा आभास देते हैं। आपको कुछ समय इस रहस्यमयी स्थान पर बिताने की इच्छा पूरी हो सकती है। दरअसल, यहां इन बागानों में ‘होम स्टे’ या ‘कॉटेज’ बने हुए हैं, जहां आप ठहरकर ऐसे कई नजारों का आनंद ले सकते हैं। आपको बता दें कि सालों तक, उत्कृष्ट गुणवत्ता की कॉफी देने वाले ये पौधे कटने के बाद भी अपनी आकर्षण नहीं खोते, बल्कि कुर्ग के बाजारों में कॉफी की लकड़ी से बने अनोखे फर्नीचर देख सकते हैं। फरवरी महीने में कॉफी के फल पक कर तैयार हो जाते हैं।

बायलाकुप्पे : दक्षिण भारत का तिब्बत
तिब्बती शैली में बने रंगबिरंगे घर, स्वच्छ एवं सुंदर गलियां और आलीशान मंदिर से सुनाई देते बौद्ध संतों के मंत्रोच्चार.., कर्नाटक के हृदय की तरह कुर्ग जिले में बसा यह ‘मनी-तिब्बत’आपको भूटान और नेपाल की गलियों-सा एहसास कराएगा। उत्तर में धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) और दक्षिण में बायलाकुप्पे तिब्बतियों की मुख्य बस्तियां हैं। धर्मशाला उनकी संसदीय राजधानी है तो दूसरी तरफ बायलाकुप्पे उनका शिक्षा केंद्र है। लद्दाख, धर्मशाला, शिमला तथा सिक्किम के कई निवासी बायलाकुप्पे में अपनी धार्मिक शिक्षा हेतु आते हैं और यही कारण है कि कर्नाटक के ज्यादातर शहरों में उत्तर और पूर्वी-भारत से आए लोग ज्यादा नजर आते हैं। बायलाकुप्पे का शांतिमय और धार्मिक वातावरण आपकी यात्रा की शुरुआत के लिए एक बेहतरीन अनुभव होगा। यह मादीकेरी से 40 किमी की दूरी पर है।

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