स्वर्ग से सुंदर सिक्किम का शानदार सफर

स्वर्ग से सुंदर सिक्किम का शानदार सफर

गंगटोक से करीब 24 किलोमीटर की दूरी पर, 5000 फीट की ऊंचाई स्थित है। यहां का स्थापत्य और दीवारों पर निर्मित भित्ती चित्र तिब्बती संस्कृति के परिचायक हैं। यह मठ करमापा लामा का प्रमुख स्थान है और 300 वर्ष पुराना है। इस मठ के साथ हनुमान टोक और गणेश टोक हैं। स्थानीय भाषा में टोक का अर्थ मंदिर से है। एक रोपवे गंगटोक को ऊपर से दिखाता है। बहुत छोटी सी राइड है लेकिन रोमांचक है। इसके अतिरिक्त गंगटोक में कई व्यू प्वाइंट हैं जहां से दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा दिखाई देती है। गंगटोक का एमजी मार्ग पर्यटकों के लिए खरीदारी और घूमने का केंद्र हैं।

गंगटोक से अगले दिन हमें छांगू लेक और और नाथूला दर्रा जाना था लेकिन सुबह से ही चर्चा थी कि छांगू झील का रास्ता खुला मिलेगा या नहीं? नाथूला का परमिट मिलेगा या नहीं? हमें छांगू झील की परमिशन तो मिली लेकिन नाथूला पास जाने का परमिट नहीं मिला। 12,310 फीट की ऊंचाई पर थी छांगू लेक और 14,200 फीट की ऊंचाई पर है नाथूला दर्रा। इस दर्रे को कभी सिल्क रूट के नाम से पूरी दुनिया में जाना जाता था। यह भारत के सिक्किम और तिब्बत की चुम्बी घाटी को जोड़ता है। छांगू लेक को त्सोंगमो झील भी कहते हैं। पहाड़ के कठिन और संकरे रास्तों को पार करते हुए जब हम छांगू लेक पहुंचे तो बर्फ से पूरी तरह जमी इस झील को देखने हजारों पर्यटक उमड़े थे। नजारा वास्तव में रोमांचक था। वहां 200 रुपए में किराए पर बर्फ में पहनने के जूते लिए और बर्फ में मस्ती करने का मन बनाया। झील से थोड़ा ऊपर कैफे है लेकिन सब जगह रेडीमेड कॉफी और चाय ही मिलती है। जिसमें चीनी भरपूर होती है। हम चाय का खास मजा तो नहीं ले पाए लेकिन सर्द हवाओं में गरम चुस्की ने आराम जरूर दिया। छांगू से लौटते समय हमने नाथुला दर्रा जाने के लिए सेना की चौकी पर पूछा तो पता चला कि ऊपर बर्फ है, गाड़ी स्किट कर रही है नाथूला नहीं जा सकते।

बहुत सुना था कि सिक्किम में एक सैनिक का मंदिर है जो आज भी सरहदों पर पहरा देते हैं। बाबा मंदिर से मशहूर यह मंदिर छांगू लेक के भी ऊपर है। यह भारतीय सेना के जवान हरभजन सिंह का मंदिर है। लोग कहते हैं कि बाबा हरभजन सिंह आज भी अपनी ड्यूटी करते हैं। इतना ही नहीं आज भी चीन के साथ जब बैठक होती है तो उनकी कुर्सी खाली रखी जाती है, उनके सामने खाने-पीने का सामान परोसा जाता है और यह माना जाता है कि वे वहां बैठे हैं।

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